क्या आपने कभी सोचा है कि जब भारतीय युद्धपोत रात के अँधेरे में समंदर चीरते हुए आगे बढ़ते हैं, तो दुश्मन रडार पर कैसी हलचल मचती होगी? 2025 में भारतीय नौसेना के बड़े-बड़े अभ्यास और दूर-दराज़ तैनातियाँ सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, बल्कि खुले संदेश हैं – “समंदर हमारा है, और नियम भी हम ही लिखेंगे।”
आज बात करेंगे उन चुनिंदा नौसैनिक अभ्यासों और तैनातियों की, जिन्होंने भारत को ‘रीजनल प्लेयर’ से उठाकर सीधे ‘मैरिटाइम पावर सेंटर’ की कुर्सी पर बिठा दिया है।
ट्रॉपेक्स 2025 : जब पूरा बेड़ा एक साथ जागता है
‘थिएटर लेवल रेडीनेस ऑपरेशनल एक्सरसाइज़’ यानी TRI-Services TROPEX 2025 जनवरी से मार्च के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में चलता है, और इसे नौसेना का फुल-स्केल वॉर रिहर्सल कहा जा सकता है। इसमें एयरक्राफ्ट कैरियर, पनडुब्बियाँ, विध्वंसक, फ्रिगेट, मरीन कमांडो – सब एक साथ, एक ही “वॉर सिनेरियो” में खेले जाते हैं, ताकि असली युद्ध की सूरत में एक सेकंड भी ‘कन्फ्यूजन’ की गुंजाइश न रहे।
ट्रॉपेक्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ सिर्फ दुश्मन देश की कल्पना नहीं होती, बल्कि साइबर अटैक, सैटेलाइट जैमिंग, ड्रोन स्वॉर्म, और लॉन्ग-रेंज मिसाइल स्ट्राइक जैसे आधुनिक खतरों का कॉम्बो पैक तैयार करके फोर्स को टेस्ट किया जाता है।
कोंकण 2025 : जब ‘विक्रांत’ और ‘प्रिंस ऑफ वेल्स’ एक ही समंदर में हों…
अक्टूबर 2025 में भारत के पश्चिमी तट पर भारत और ब्रिटेन की नौसेनाओं ने ‘कोंकण 2025’ अभ्यास किया, लेकिन इस बार दांव पहले से कहीं बड़ा था। एक तरफ भारत का स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत था, तो दूसरी तरफ ब्रिटेन का HMS Prince of Wales – और ऊपर से यूके कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ नॉर्वे और जापान की भागीदारी ने इसे मिनी “कोएलिशन फ्लीट” में बदल दिया।
एंटी-एयर, एंटी-सर्फेस और एंटी-पनडुब्बी युद्धाभ्यास, फ्लाइंग ऑपरेशन, Replenishment-at-Sea जैसे हाई-एंड ड्रिल्स ने साफ कर दिया कि अगर इंडो-पैसिफिक में किसी को ‘सी कंट्रोल’ चाहिए, तो भारत को नज़रअंदाज़ करना अब नामुमकिन है।
मालाबार 2025 : गुआम से उठी ‘क्वाड’ की लहर
उत्तरी प्रशांत के गुआम में आयोजित ‘मालाबार 2025’ में भारतीय युद्धपोत INS सह्याद्री ने अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर जब फ्लैग दिखाया, तो संदेश बहुत साफ था – क्वाड सिर्फ मीटिंग रूम की फोटो-ऑप नहीं, बल्कि समुद्र में खड़ा असली सैन्य नेटवर्क है।
इस बहुपक्षीय अभ्यास का फोकस था – इंडो-पैसिफिक में समुद्री समन्वय, इंटरऑपरेबिलिटी और ऑपरेशनल रेडीनेस बढ़ाना, ताकि किसी भी संकट की घड़ी में चारों नौसेनाएँ बिना टाइम खोए एक ही “कॉम्बाइंड फोर्स” की तरह काम कर सकें। INS सह्याद्री की भागीदारी ने यह भी दिखाया कि भारत अब सिर्फ पार्टनर नहीं, बल्कि स्वदेशी युद्धपोतों के दम पर एक कॉन्फिडेंट ब्लू-वॉटर नेवी बन चुका है।
समुद्र शक्ति 2025 : विशाखापत्तनम से इंडो-पैसिफिक तक
अक्टूबर 2025 में विशाखापत्तनम के तट से भारत और इंडोनेशिया ने ‘समुद्र शक्ति 2025’ का पाँचवाँ संस्करण आयोजित किया, जो इंडो-पैसिफिक में “कोस्टल पार्टनरशिप” को हार्ड पावर सपोर्ट देता है। हेलीकॉप्टर ऑपरेशन, वायु रक्षा, हथियार अभ्यास, विजिट-बोर्ड-सीज़-एंड-सर्च (VBSS) जैसी गतिविधियों ने दोनों नौसेनाओं की वास्तविक युद्ध तैयारी और समन्वय को नए लेवल पर पहुँचा दिया।
ये वही क्षेत्र है जहाँ चीन अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहा है, इसलिए भारत–इंडोनेशिया का यह घनिष्ठ समुद्री सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय ट्रेनिंग नहीं, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
पैसिफिक रीच 2025 : जब ‘INS निस्तार’ बना गहरे समंदर का लाइफगार्ड
INS निस्तार, भारतीय नौसेना का स्वदेशी डिज़ाइन किया गया डाइविंग सपोर्ट वेसल, सितंबर 2025 में सिंगापुर के चांगी पहुँचा, जहाँ उसने बहुराष्ट्रीय ‘पैसिफिक रीच 2025’ अभ्यास में हिस्सा लिया। इस अभ्यास में 40 से ज़्यादा देशों की भागीदारी रही, और फोकस था – पनडुब्बी बचाव, डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू, मेडिकल रिस्पॉन्स और हाई-टेक अंडरवाटर ऑपरेशन।
INS निस्तार अपने डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल (DSRV) और एडवांस गोताखोरी सिस्टम की मदद से “मदरशिप” की भूमिका निभाता है, यानी अगर किसी देश की पनडुब्बी हज़ारों मीटर नीचे फँस जाए, तो भारत उसे सिर्फ मैप पर नहीं, बल्कि मिशन में भी सपोर्ट कर सकता है।
बोनो सागर, वरुणा और बाकी समुद्री मोर्चे
मात्र एक साल में भारत ने ‘बोनो सागर’ (भारत–बांग्लादेश, बंगाल की खाड़ी), ‘वरुणा’ (भारत–फ्रांस, अरब सागर) और ‘सी ड्रैगन’ (भारत सहित कई देशों के साथ गुआम में एंटी-सबमरीन फोकस्ड ड्रिल) जैसे कई प्रमुख अभ्यासों में हिस्सा लेकर यह दिखाया कि उसका नौसैनिक नेटवर्क हिंद महासागर से सीधे पश्चिमी प्रशांत तक फैला हुआ है।
इन अभ्यासों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम पैट्रोल, और मल्टी–नेशन कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम की ट्रेनिंग होती है, ताकि किसी भी समुद्री संकट – चाहे वह ब्लॉकेड हो, पायरेसी हो या फ्लैश कॉन्फ्लिक्ट – के दौरान इंडियन नेवी अकेली नहीं, बल्कि एक बड़े गठजोड़ के साथ खेल में उतरे।
तो निष्कर्ष क्या है? समंदर में भारत अब “ऑप्शन” नहीं, “अनिवार्यता” है
2025 के ये बड़े नौसैनिक अभ्यास और तैनातियाँ सिर्फ फोटो, शिष्टाचार और प्रेस रिलीज़ की ख़बरें नहीं हैं, यह इस बात का ऐलान हैं कि अगर इंडो-पैसिफिक में किसी को व्यापार, ऊर्जा सप्लाई और समुद्री सुरक्षा की गारंटी चाहिए, तो नई दिल्ली स्थित नौसेना मुख्यालय को साइडलाइन करके बात होने वाली नहीं।
हर नए समुद्री अभ्यास के साथ भारतीय नौसेना यह इमेज बना रही है – “हम सिर्फ अपने समुद्र की रखवाली नहीं करते, बल्कि दोस्त देशों को भी सुरक्षा की छतरी देते हैं”; और यही बात भारत को आने वाले दशक में इंडो-पैसिफिक का अनिवार्य समुद्री शक्ति–केन्द्र बना सकती है।


